September 27, 2022
IPO क्या होता है? What is IPO in Hindi

IPO क्या होता है? What is IPO in Hindi

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IPO क्या होता है? आईपीओ में इन्वेस्ट कैसे करें? What is IPO in Hindi? How does a company issue an IPO? Where do we apply for IPO?

आईपीओ क्या होता है? आईपीओ में इन्वेस्ट करने से करोड़ों रुपये कैसे बन जाते हैं? और हम आईपीओ में कहाँ से इन्वेस्ट कर सकते हैं? इस पोस्ट में हम इन सारे सवालों के जवाब जानेंगे। 

IPO क्या होता है? 

IPO का पूरा मतलब होता है Initial Public Offering. 

जब भी कोई कंपनी अपने शेयर्स को पब्लिक में फर्स्ट टाइम सेल करती है तो उस प्रोसेस को हम Initial Public Offering कहते हैं। कंपनियां बहुत सारे कारनों से आईपीओ लाती है जैसे बिज़नेस एक्सपेंसन के लिए, पुराने लोन को चुकाने के लिए, न्यू प्रोडक्ट या सर्विस को लॉन्च करने के लिए, या किसी दूसरी कंपनी को खरीदने के लिए। 

कंपनी IPO कैसे जारी करती है? 

जब भी कोई कंपनी आईपीओ लाने का प्लान करती है तो उसे एक डिटेल डॉक्यूमेंट बनाना पड़ता है जिसमें कंपनी की सारी डिटेल्स होती है। जैसे कंपनी की हिस्ट्री, फाइनेंसियल डिटेल्स, फ्यूचर प्लान आदि। उस डॉक्यूमेंट को DRHP या Draft Red Herring Prospectus कहते हैं। कंपनियों को यह डॉक्यूमेंट SEBI के पास सबमिट करना होता है। SEBI या Securities and Exchange Board of India एक गवर्नमेंट बॉडी है जो स्टॉक मार्केट को रेगुलेट करती है ठीक जैसे RBI बैंकों को रेगुलेट करती है। SEBI सबमिट की हुए DRHP को रिव्यु करती है और आईपीओ लाने की परमिशन देती है।  परमिशन मिलने के बाद कंपनी आईपीओ लाने के लिए रेडी हो जाती है। आईपीओ लाना एक कॉम्प्लेक्स प्रोसेस होता है इसलिए आईपीओ लाने के लिए कंपनियां इन्वेस्टमेंट बैंकों को हायर करती है जिनका काम होता है IPO लाने के लिए कंपनियों की हेल्प करना। इन्वेस्टमेंट बैंकों कंपनियों के साथ मिलकर आईपीओ का सारा प्लान बनाती है और फिर IPO को पब्लिकली ओपन किया जाता है ताकि पब्लिक इसमें  अप्लाई कर सके।  आईपीओ मिनिमम 3 डेज और मैक्सिमम 10 डेज के लिए ओपन रहता है। इस पीरियड को हम आईपीओ का इशू पीरियड भी कहते हैं। अगर हमें आईपीओ में इन्वेस्ट करना है तो हमें इशू पीरियड में ही अप्लाई करना होगा। इसे हम एक एक्साम्पल की मदद से समझते हैं। 

Example – मान लेते हैं XYZ कंपनी आईपीओ के माध्यम से 1000 करोड़ रुपये क्लेयर्ड करने का प्लान करती है और इसके लिए XYZ कंपनी अपना 20% हिस्सा सेल करना चाहती है। कंपनी इसके लिए 1 करोड़ सेल निकालती है और हर सेल की प्राइस 1000 रुपये रखती है। आईपीओ में शेयर्स लॉट या बंडल  में अल्लॉव होते हैं और यह रूल है कि एक आईपीओ की प्राइस 15,000 रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती। एक लॉट म में कितने शेयर्स होंगे  यह एक शेयर के प्राइस से डिसाइड होता है। हमने XYZ कंपनी के एक शेयर्स का प्राइस 1000 रुपये रखा है इसलिए यहाँ पर 1 लौट में 15 शेयर्स ही आएंगे। अगर हम यहाँ 1 सेल की प्राइस को 500 कर दें तो 1 लॉट में 30 सेल्स हो जायेंगे। आईपीओ ओपन होने के बाद पब्लिक उस आईपीओ में अप्लाई करती है। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है कि जरुरी नहीं है कि अगर हमने आईपीओ में अप्लाई किया है तो हमें शेयर्स मिलेंगे ही, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अक्सर एक कंपनी जितने शेयर्स निकालती है उससे कई ज्यादा शेयर्स के लिए पब्लिक अप्लाई कर देती है। और ऐसा होने पर शेयर्स का अलॉटमेंट कंप्यूटर से रैंडम्ली होता है। अगर हमने आईपीओ में 2 लोट के लॉट के लिए अप्लाई किया है तो हो सकता है कि हमें बस 1 लॉट शेयर मिले या 1 लॉट भी ना मिले। 

IPO में इन्वेस्ट करके करोड़ों रुपये कैसे बन जाते हैं? 

साल 1980 में Wipro ने अपना आईपीओ लाया था। आईपीओ के टाइम पर Wipro की शेयर्स की प्राइस 100 रुपये थे। अगर IPO के टाइम पर किसी ने 10,000 रुपये इन्वेस्ट करके Wipro के 100 शेयर्स लिए होते और उसे अभी तक रखा होता तो बोनस और स्प्लिट मिलाकर उसके पास 2019 में 1,92,00000 लाख शेयर्स होते। और आज लगभग 1 शेयर्स की प्राइस 250 रुपये है। तो शेयर्स की टोटल वैल्यू 482 करोड़ रुपये होती। बोनस और स्प्लिट दो तरह के होते हैं जिसके थ्रू कंपनी अपने शेयर होल्डर्स को एक्स्ट्रा शेयर्स देती है। तो इस तरह से हम आईपीओ के टाइम पर इन्वेस्ट करके करोड़ों रुपये बना सकते हैं। पर ध्यान दने वाली बात यह है कि हमें उसी कंपनी के शेयर्स आईपीओ में लाने की कोशिश करनी चाहिए जिसके फ्यूचर में ग्रोथ के चान्सेस हाई हो और जिस कंपनी ने पास्ट में अपने बिज़नेस को अच्छे से ग्रो किया हो। साथ ही साथ आईपीओ में लिए हुए शेयर्स को हमें लंबे समय तक होल्ड भी करना होगा क्योंकि अगर हम अच्छी कंपनी में इन्वेस्ट नहीं करेंगे और शेयर्स को लंबे समय तक होल्ड नहीं करेंगे तो हमें बहुत अच्छे रिटर्न्स नहीं मिलेंगे। 

IPO में हम कहाँ से अप्लाई करें? 

आईपीओ में हम ऑनलाइन या ऑफलाइन अप्लाई कर सकते हैं। आईपीओ में अप्लाई करने की फैसिलिटी हर बैंक देती है। और ऑफलाइन हम आईपीओ एप्लीकेशन फॉर्म खुद अपने ब्रोकिंग फर्म के पास भर सकते हैं। हर ब्रोकर में यहाँ आईपीओ में अप्लाई करने की फैसिलिटी नहीं होती है। इसलिए अच्छा रहेगा कि आप अपने ब्रोकर के साथ जरूर बात कर लें। 

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