तो होम लोन रीपेमेंट पर ऐसे मिलेगा फायदा

लोग अक्सर घर खरीदने के लिए लोन लेते हैं और दुसरे शहर में किराया भी देते हैं, लेकिन आयकर से उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता है।

आज हम कुछ उपायों के बारे में बात करेंगे जिससे आपको आयकर में छूट मिल सके और आप तेजी से अपने घर का लोन चुका सकें।

आपके होम लोन ईएमआई में दो भाग होते हैं, ब्याज और मूलधन। शुरुआत में ईएमआई पर ब्याज का हिस्सा अधिक होता है, लेकिन यह समय के साथ मूलधन के भुगतान के साथ धीरे-धीरे कम हो जाता है।

किराए पर दिए गए घर के मामले में, आप केवल होम लोन के ब्याज भुगतान पर कर कटौती का दावा कर सकते हैं।

दूसरी ओर एक स्वाधिकृत घर आपको टैक्स बचाने के दो रास्ते देता है। आप आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 24बी के तहत ब्याज भुगतान पर 2 लाख रुपये और धारा 80सी के तहत मूल भुगतान पर 1.5 लाख रुपये की कटौती पर राहत पा सकते हैं।

यदि आपके पास दो घर है तो आप केवल एक को स्वयं के घर के रूप में दावा कर सकते है।

जब दूसरे घर की बात आती है तो मालिक को आयकर कानून के अनुसार इसे किराए पर दिया गया समझा जाता है। और यह आपकी आय में किराया को भी शामिल करता है।

आपका घर चाहें खाली हो या कोई सदस्य घर में रहता हो आपको इस पर टैक्स देना होता है।

सरकार ने इस मामले में नियमों में बदलाव किया था और अगर एक व्यक्ति के पास एक शहर में या दूसरी जगह दो घर हैं तो वह आयकर क्लेम कर सकता है।

अगर आपका एक ही शहर में दो घर है और आप रोजगार के वजह से किराए पर रहते हैं तो आपको हाउस अलाउंस पर छूट मिलेगा।

आप किराए पर टैक्स छूट के लिए क्लेम कर सकते हैं।

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