September 25, 2022
Does Life Insurance Cover Suicide | क्या लाइफ इंश्योरेंस में सुसाइड कवर होती है?

Does Life Insurance Cover Suicide

शेयर करें अपने दोस्तों के साथ

Life Insurance Policy अनहोनी होने पर अपने परिवार को फिनेंशली सपोर्ट देने के लिए खरीदी जाती है। इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी होल्डर के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट करती है जिससे पॉलिसी होल्डर की किसी कारण से डेथ हो जाए तो नॉमिनी को बीमा रकम दी जा सके।

कॉन्ट्रैक्ट में इंश्योरेंस कंपनी किसी भी कारण से अगर पॉलिसी होल्डर की डेथ होती है तो बीमा रकम चुकाने का दावा करती है। लेकिन कंपनियों के लिए ये भी जरुरी है कि वो दावा वास्तविक हो। कंपनी के साथ किसी प्रकार का फ्रॉड न किया गया हो। क्यों कि कोई भी कंपनी प्रॉफिट के लिए ही कोई भी बिज़नेस करती है। और अपने बिज़नेस के सुरक्षा के लिए उन्हें कुछ नियमों को बनाने की अनुमति दी जाती है। जिसे पॉलिसी में exclusions कहा जाता है। मतलब अपवाद। ऐसे किस्सों में कंपनी क्लेम को रिजेक्ट कर सकती है। आज के इस पोस्ट में हम सुसाइड क्लॉज़ के बारे में बात करेंगे।

क्या लाइफ इंश्योरेंस में सुसाइड कवर होती है? – Does Life Insurance Cover Suicide?

हर साल वर्ल्ड में 8 लाख से भी ज्यादा लोग सुसाइड करते हैं। जिस में से 17.5% लोग इंडिया के है और हर साल यह आकड़ा बढ़ रहा है। इंडिया में हर साल करीब 1.40 लाख लोग सुसाइड के कारण मरते हैं, जिस में 15-39 उम्र के लोग सबसे अधिक हैं। और इसी कारण से इंडिया सुसाइड में वर्ल्ड में टॉप 12 में भी शामिल है। इंडिया में सुसाइड के मुख्य कारण फॅमिली प्रोब्लेम्स, डिप्रेशन, बीमारी, मैरिज के कारण कोई इशू, लव अफैर और फाइनेंसियल प्रॉब्लम जैसे कई कारण है।

सुसाइड क्लॉज़ पॉलिसी डॉक्यूमेंट में भी मेंशन किया जाता है। इसमें लिखा होता है – अगर पॉलिसी होल्डर पॉलिसी लेने के बाद या अगर पॉलिसी लेप्स हो गयी हो और फिर से शुरू की गयी हो तो उस तारीख से 12 महीने के अंदर सुसाइड करता है तो पॉलिसी में से किसी भी प्रकार का क्लेम नहीं मिलेगा। कुछ कंपनियों के किस्से में ये 2 साल तक का हो सकता है। तो इस पीरियड के अंदर आए हुए सुसाइड क्लेम को बिना किसी स्पष्टीकरण के रिजेक्ट कर दिया जाएगा। चाहे फिर उस व्यक्ति ने सुसाइड अपने होश और आवाज में किए हो या पागलपन में किया हो।

irdai ने 1st जनुअरी 2014 को सुसाइड क्लॉज़ में चेंज किया था। जिसे 1st जनुअरी 2014 से पहले जो पॉलिसी इशू हुई है तो उसमे पुराना कानून लगेगा। और 1st जनुअरी 2014 के बाद जो पॉलिसी इशू हुई है तो उसमे नया सुसाइड क्लॉज़ लागु होगा।

ओल्ड सुसाइड क्लॉज़ – मतलब 1st जनुअरी 2014 से पहले ली हुई पॉलिसी में अगर कोई 1 साल के अंदर सुसाइड करता था तो पॉलिसी को बंद कर दिया जाता था और नॉमिनी को कोई रकम नहीं दी जाती थी। 

न्यू सुसाइड क्लॉज़ – न्यू सुसाइड क्लॉज़ में अगर कोई व्यक्ति 1 साल के अंदर में सुसाइड करता है , तो अगर मार्किट लिंक प्लान है तो 100% फंड वैल्यू और अगर नॉन लिंक्ड ट्रेडिशनल प्लान है तो 80% ऑफ़ प्रीमियम नॉमिनी को रिटर्न किया जाता है। 

टर्म इंश्योरेंस में 1 साल के अंदर सुसाइड डेथ में कोई रकम नहीं दी जाती। और 1 साल बाद आए हुए क्लेम पर बीमा रकम दी जाती है। अगर पॉलिसी लेते वक्त पॉलिसी होल्डर ने कोई गलत जानकारी दी है तो 1 साल बाद भी क्लेम आने पर क्लेम नहीं मिलेगा। जैसे कि पॉलिसी होल्डर पहले से ही बीमार था और 1 साल बाद सुसाइड करता है तो गलत इनफार्मेशन के आधार पर कंपनी क्लेम को रिजेक्ट कर देगी। 

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के अंदर सुसाइड केस में क्लेम का भुगतान लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के विवेक पर आधारित है। जहाँ क्लेम रिजेक्शन की संभावना ज्यादा है। 

यह भी पढ़े: – 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

TATA Capital EMI Card कैसे बनाए? फिनबूस्टर क्रेडिट कार्ड ऑनलाइन कैसे अप्लाई करें Dhani One Freedom Card Kya Hai? Samsung Fingerprint Credit Card क्या है? Bandhan Bank One Credit Card Kaise Le
TATA Capital EMI Card कैसे बनाए? फिनबूस्टर क्रेडिट कार्ड ऑनलाइन कैसे अप्लाई करें Dhani One Freedom Card Kya Hai? Samsung Fingerprint Credit Card क्या है? Bandhan Bank One Credit Card Kaise Le