September 25, 2022
हेल्थ इन्शुरन्स क्या होता है

हेल्थ इन्शुरन्स

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हेल्थ इन्शुरन्स क्या होता है? | What is Health Insurance in Hindi | Health Insurance Plans | Health Insurance Companies | Health Insurance in India 

आज के समय में जब इंसान बीमार पड़ता है, फिर हॉस्पिटल में एडमिट होता है तो हॉस्पिटल का बिल 100 या 200 से 1000, 10000 या फिर 1,00, 000 तक पहुंच जाता है। और किसी को पता भी नहीं चलता है। कई बात तो ऐसा भी होता है कि  बिल की रकम इतनी ज्यादा होती है कि बिल भरने के लिए इंसान को अपना बहुत कुछ बेचना पड़ जाता है। लेकिन ऐसा कुछ भी ना होता अगर कुछ इंसान ने हेल्थ इन्शुरन्स लिया होता। इसलिए दोस्तों आज हम इस पोस्ट में यह जानेंगे कि हेल्थ इन्शुरन्स क्या होता है? और उससे रिलेटेड कुछ बातें जो आपको पता होनी चाहिए। 

यह भी पढ़े – हेल्थ इन्शुरन्स क्या है और क्यों जरुरी है? – What is Health ​Insurance and Why is it Important in Hindi?

हेल्थ इन्शुरन्स क्या होता है? 

हेल्थ इन्शुरन्स एक ऐसा इन्शुरन्स है जिसमें अगर आप एक दिन से ज्यादा के लिए हॉस्पिटल में एडमिट हो जाते हैं तो जो भी खर्चा होगा वह हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी देगी, अगर आप कंपनी एफिलिएटेड हॉस्पिटल में एडमिट हुए हैं तो। लेकिन अगर किसी और हॉस्पिटल में एडमिट हुए हैं तब तो खर्चा आप ही को करना पड़ेगा। लेकिन कंपनी आपको बाद में रीइंबर्स कर देगी वह पैसा जो आपने खर्चा किया है। यानि कि कंपनी आपको वह पैसा लौटा देगी जो आपने उस हॉस्पिटल में खर्चा किया। लेकिन आपको एडमिट एक दिन से ज्यादा के लिए होना होगा। हेल्थ इन्शुरन्स के प्लान में आप काफी चीजें पा सकते हैं। जैसे कैशलेश ट्रीटमेंट, रीइंबर्समेंट ऑफ़ मेडिकल एक्सपेंसेस और प्री पोस्ट हॉस्पीटलाइज़ेशन एक्सपेंसेस। दोस्तों भारत सरकार भी हेल्थ इन्शुरन्स को प्रमोट करती है और एक जरुरत मानती है। इसलिए सेक्शन 80d के तहत आप हेल्थ इन्शुरन्स के प्रीमियम से इनकम टैक्स बचा सकते हैं। 

हेल्थ इन्शुरन्स कंपनीज इन इंडिया 

हेल्थ इन्शुरन्स के लिए भारत में कई सारे कंपनीज है। जैसे Max Bupa (Niva Bupa), HDFC ERGO, Bharti AXA, SBI Health, Bajaj Allianz, Reliance Health और इनके जैसी बहुत सारी कंपनीज है जो हेल्थ इन्शुरन्स में डील करती है। 

फ्री लुक पीरियड 

दोस्तों हेल्थ इन्शुरन्स में एक बहुत ही अच्छी खासियत है कि इसमें हमें फ्री लुक पीरियड मिलता है। जो 15 दिनों का होता है। फ्री लुक पीरियड लगभग हर कंपनी देती है। दोस्तों फ्री लुक पीरियड वह पीरियड होता है जिसके दौरान आप अगर चाहे तो अपनी पॉलिसी को रिटर्न कर सकते हैं। जब आप पॉलिसी लेंगे हेल्थ इन्शुरन्स की तो आपको प्रीमियम तुरंत देना पड़ेगा लेकिन फ्री लुक पीरियड के दौरान आप पॉलिसी को रिटर्न कर सकते हैं इन्शुरन्स कंपनी को। आपने जो प्रीमियम दिया था वह प्रीमियम आपको वापस कर दिया जाएगा। अगर कोई मेडिकल का टेस्ट आपका लिया गया है इस पॉलिसी के दौरान, तो उस मेडिकल टेस्ट का खर्चा उस प्रीमियम से काट लिया जायेगा और बाकि का पैसा आपको रिटर्न कर दिया जायेगा। यानि कि आप पॉलिसी को वापस कर सकते हैं और कैंसिल कर सकते हैं। 

वेटिंग पीरियड 

हेल्थ इन्शुरन्स में एक वेटिंग पीरियड भी होता है जिसे समझना बहुत जरुरी है। वेटिंग पीरियड एक पीरियड है जिसके बीच में अगर आप कोई क्लेम करते हैं तो आपका क्लेम पास नहीं होगा। हर कंपनी वेटिंग पीरियड का यूज़ करती है और हर कंपनी में वेटिंग पीरियड अलग-अलग होता है। यह कुछ महीनों का होता है। तो जैसा मान ले कि आपने आज हेल्थ इन्शुरन्स लिया और जिस कंपनी से लिया है उस कंपनी में अगर कम से कम 4 महीने का वेटिंग पीरियड है तो आज से 4 महीने के बीच में अगर आप बीमार पड़ते हैं या हॉस्पीटलाइज़्ड होते हैं, तो खर्चा आपको हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी नहीं देगी। तो ये वेटिंग पीरियड के अंदर आ जाता है। लेकिन अगर 4 महीने के पूरा हो जाने के बाद अगर आप बीमार पड़ते हैं और आप हॉस्पिटल में एडमिट होते हैं, तब हॉस्पिटल का सारा खर्चा हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी ही देगी या वह रीइंबर्स करेगी। मोस्ट इन्शुरन्स कंपनीज वेटिंग पीरियड का इस्तेमाल करती है। 

यह भी पढ़े – Types of Life Insurance in Hindi | | लाइफ इन्शुरन्स के प्रकार जो आप ले सकते हैं

एप्लीकेबिलिटी ऑफ़ मैटरनिटी 

हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में मैटरनिटी यानि प्रेगनेंसी रिलेटेड एक्सपेंसेस कवर होते हैं या नहीं यह बहुत बड़ी दुविधा है। कई इन्शुरन्स कंपनीज मैटरनिटी बेनिफिट को या तो पॉलिसी के साथ दे देती है, बिना किसी एक्स्ट्रा खर्च के। और कई इन्शुरन्स कंपनीज मैटरनिटी बेनिफिट को राइडर के तौर पर ऑफर देती है। जिसे अगर आपको खरीदना है तो आप एडिशनल अमाउंट देकर खरीद सकते हैं। 

दोस्तों 4 ऐसी इन्शुरन्स कंपनीज है जो अपने प्रोडक्ट में मैटरनिटी बेनिफिट देती है बिना राइडर के –

  1. Royal Sundaram 
  2. Apollo Munich 
  3. Cigna TTK Health 
  4. Star Health 

तो ये 4 कंपनीज है जो मैटरनिटी बेनिफिट देती है अपनी पॉलिसी में। 

आउटपेशेंट एक्सपेंसेस 

अगर आप एक दिन से ज्यादा के लिए हॉस्पीटलाइज़्ड होते हैं, तो हॉस्पिटल के खर्चे के साथ X-Ray, MRI, Diagnostic Test के सभी खर्चे को कंपनी पे करेगी। लेकिन अगर आप एडमिट नहीं होते हैं तो कंपनी कुछ पे नहीं करेगी। और तव X-Ray, MRI, और  Diagnostic Test के सभी खर्चे आउटपेशेंट एक्सपेंसेस कहलाते हैं। जिसको कुछ कंपनीज जैसे ICICI Lombard, Apollo Munich अपनी बेस पॉलिसी में कवर करती है। और कुछ कंपनीज जैसे National Insurance इसे एडिशनल प्लान के तौर पर ऑफर करती है। अगर आपको यह यूज़ करना है तो इसके लिए आपको एडिशनल प्लान को खरीदना पड़ेगा यानि राइडर खरीदना पड़ेगा। 

कितनी बार क्लेम फाइल कर सकते हैं? 

इसका जवाब यह है कि हम अनगिनत बार क्लेम फाइल कर सकते हैं लेकिन सिर्फ उसके डिउरेशन में और जितना सम एश्योर्ड आपका बैलेंस बचा होगा उसके लिए। 

मान लीजिये आपने 5 लाख का सम एश्योर्ड लिया है 1 साल के लिए और 1 साल में ही आपने शुरुवात के ही 6 महीने के अंदर आप बीमार होकर हॉस्पीटलाइज़्ड हुए और उसमें आपका खर्चा 2 लाख रुपये हो गया। वह कंपनी ने दे दिया। तो अब आपके पास बैलेंस 6 महीने के लिए बचा सिर्फ 3 लकह रुपये। अगर आप दोबारा इन 6 महीनों में बीमार पड़ते हैं, तो कंपनी 3 लाख तक का ही खर्चा करेगी, उससे ज्यादा नहीं करेगी। क्यों कि आपने सम एश्योर्ड ही 5 लाख का लिया था। 

यह भी पढ़े – टर्म इन्शुरन्स पॉलिसी क्या होता है? | आपको टर्म इन्शुरन्स पॉलिसी क्यों लेना चाहिए?

हेल्थ इन्शुरन्स लेने से पहले यह बातें आपको पता होनी चाहिए 

हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी खरीदना एक बहुत ही ध्यान देने वाला प्रोसेस है। जो कि इसको खरीदने से पहले कुछ पॉइंट्स होते हैं जिन पर आपको ध्यान जरूर देना चाहिए। 

(1) क्या कवर है और क्या कवर नहीं है

कोई भी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी सारी बीमारियों को कवर नहीं करती है, तो इसलिए कोई भी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी आप लेते हैं तो इम्पोर्टेन्ट ये है कि आप चेक करे कि उसमें कौन-कौन सी बीमारियां कवर्ड है। एटलीस्ट इस बात का ध्यान तो आपको रखना ही पड़ेगा कि जो हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी आप ले रहे हैं उसमें बड़ी-बड़ी बीमारियां जैसे कैंसर, टीवी मतलब जो बड़ी-बड़ी बीमारियां है वह तो एटलीस्ट कवर करती ही हो। क्यों कि इन सब में खर्चा बहुत ज्यादा होता है। 

(2) पहले से मौजूत बीमारियों को जरूर डिक्लेअर करे

दोस्तों अपना रेगुलर हेल्थ चेकउप साल में जरूर करवाए। और अगर पहले से ही कोई बीमारी अपने शरीर में है तो हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी लेने पर उसको पॉलिसी में डिक्लेअर जरूर करे। ऐसा ना करने पर कल को पॉलिसी की क्लेम पर आपको डिले या रिजेक्शन का सामना करना पड़ सकता है। 

(3) हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी कब से इफेक्टिव होगी 

आपकी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी कब से इफेक्टिव होगी इसका आपको पता होना चाहिए। कोई हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी कुछ दिन से कवर नहीं देती है जिस दिन से आपने पॉलिसी ली है। हर पॉलिसी के कवर के शुरू होने का एक समय है जो आपको पता होना चाहिए। यह समय 3 या 4 महीने का हो सकता है। लेकिन कवर के शुरू होने के पहले अगर आप कोई मेडिकल ट्रीटमेंट कराते हैं, तो आपका क्लेम हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी पास नहीं कराएगी। 

(4) फॅमिली या इंडिविजुअल पॉलिसी का ध्यान होना चाहिए 

पॉलिसी लेते वक्त इस बात का ध्यान रखे कि आप पॉलिसी इंडिविजुअल प्लान में ले रहे हैं या फॅमिली प्लान में ले रहे हैं। फॅमिली इन्शुरन्स प्लान इंडिविजुअल प्लान से सस्ता होता है। लेकिन इस बात का आपको पता होना चाहिए कि कुछ फॅमिली पॉलिसीस में अगर मैं होल्डर मर जाता है, तो हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी भी ख़त्म हो जाता है। तो इस बात पर भी जरूर ध्यान दें पॉलिसी लेते वक्त। इसके अलावा इस बात का ध्यान रखे, अगर आप अपने ओल्ड ऐज पेरेंट्स को ऐड कर रहें है फॅमिली प्लान में तो सम एश्योर्ड ज्यादा से ज्यादा रखे क्यों कि वह फ्रीक्वेंटली बीमार पड़ते हैं। और कम सम एश्योर्ड अगर आप रखते हैं तो आपका सारा सम एश्योर्ड उनकी बीमारी पर ही खर्चा हो जायेगा। और आपके लिए या आपके परिवार के लिए कुछ बचेगा ही नहीं या बचेगा तो बहुत कम बचेगा। इसलिए पेरेंट्स को ऐड करते वक्त सम एश्योर्ड ज्यादा से ज्यादा रखे ताकि आपको भी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी का लाभ मिल सके। 

(5) पॉलिसी में प्रीमियम को अच्छे से समझे 

दोस्तों मेडिकल पर इंसान को बहुत ज्यादा खर्चा करना पड़ता है क्यों की दाम तेजी से बढ़ रहा है हर बीमारी के इलाज के। इसलिए ये जरुरी है कि हेल्थ इन्शुरन्स लेते वक्त सिर्फ प्रीमियम पर ध्यान ना दे बल्कि सम एश्योर्ड और कवरेज पर भी ध्यान दे। जब पॉलिसी ले तो कम दाम की पॉलिसी पर ही ध्यान ना दे। क्यों कि जो कम दाम की पॉलिसी होती है वह सिर्फ कुछ ही बीमारियों को कवर करती है। बीमारी किसी को भी बताकर नहीं आती है कि वह कौन सी आने वाली है। इसलिए बजट में अगर आपकी हो तो प्लान लेते वक्त ज्यादा से ज्यादा बीमारियों को कवर करने वाली पॉलिसी ही लें। 

तो आज के इस पोस्ट में आपने जाना कि हेल्थ इन्शुरन्स क्या है और हेल्थ इन्शुरन्स से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जो आपको पता होनी चाहिए। आशा करते हैं कि आपको ये जानकारी जरूर काम की लगी होगी अगर आपको ये पोस्ट अच्छा लगा हो टी इसे अपने दोस्तों को भी जरूर शेयर करे और इन्शुरन्स से सम्बंधित और भी जानकारी जानने के लिए इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करें। 

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