September 26, 2022
लाइफ इन्शुरन्स लेने से पहले इन 10 बातों का रखे ध्यान

लाइफ इन्शुरन्स

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हमें जब भी लाइफ इन्शुरन्स का कोई नया प्लान लेना होता है तब या तो ऑनलाइन सर्च करते हैं या फिर एजेंट को कॉल करते हैं। और कई बार तो इन्शुरन्स एजेंट हमें समझा बुझाकर या फिर हमारे पीछे पड़ते हुए पॉलिसी बेच देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्शुरन्स खरीदने से पहले  ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो हमारे एजेंट जाने अनजाने में हमें नहीं बताते हैं। आज हम ऐसे 10 पॉइंट्स डिसकस करेंगे जिनका ध्यान आपको इन्शुरन्स पॉलिसी लेने से पहले जरूर रखना चाहिए। चलिए देखते हैं वह 10 बातें कौन से हैं जो आपको इन्शुरन्स लेने से पहले जरूर ध्यान रखना चाहिए। 

लाइफ इन्शुरन्स लेने से पहले इन 10 बातों को ध्यान में रखे (10 Things to Know Before you Buy a Life Insurance Policy in India) 

1 . इन्शुरन्स और इन्वेस्टमेंट को अलग-अलग रखना चाहिए 

सबसे पहली गलती जो हम इंडियंस अक्सर करते हैं वह यह है कि हम इन्शुरन्स को इन्वेस्मेंट समझते हैं। इन्शुरन्स एक रिस्क कवरेज टूल है जिसे पॉलिसी होल्डर के डेथ के बाद उसके फॅमिली को फाइनेंसियल हेल्प हो सकती है। और हम सोचते हैं कि ऐसा प्लान ले लें जो इन्शुरन्स के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट भी हो जाये अच्छे रिटर्न्स के लिए लाइफ इन्शुरन्स पॉलिसी लेना समझदारी नहीं है। सुनने में अजीब लगता है पर यही सही तरीका है फाइनेंसियल प्लानिंग का। अगर हम इन्शुरन्स को इंवेस्टमनेट की तरह खरीदेंगे तो इसमें दो नुकसान है-

पहला नुकसान तो यह कि ऐसी पॉलिसी जहाँ आपको रिटर्न्स मिलने वाले हैं उनका प्रीमियम भी ज्यादा होता है टर्म इन्शुरन्स की प्रीमियम से और कवर भी कम मिलता है। 

दूसरा नुकसान, इसमें फण्ड मैनेजमेंट चार्जेज, मोर्टेलिटी चार्जेज जैसे बहुत सारे दूसरे चार्जेज भी लगते हैं जिनसे रिटर्न्स कम हो जाते हैं। इसलिए हम सजेस्ट करेंगे कि आप इन्शुरन्स के लिए टर्म इन्शुरन्स लें और इंवेस्टमनेट के लिए म्यूच्यूअल फण्ड ख़रीदे। 

2 . अपनी रिटायरमेंट की ऐज तक पॉलिसी लेना चाहिए 

बहुत से लोगों का यह सवाल रहता है कि हमें इन्शुरन्स पॉलिसी का कवर कितने साल के लिए लेना चाहिए तो इसके लिए हम आपको बहुत सिंपल सा तरीका बताते हैं, आप अपनी रिटायरमेंट ऐज से अपनी करंट ऐज को माइनस कर लीजिये। जैसे अगर आप 60 इयर्स में रिटायर होना चाहते हैं और आज आपकी उम्र 35 साल है तो आपको 25 इयर्स के लिए इन्शुरन्स लेना चाहिए। 

3 . इन्शुरन्स पॉलिसी को ऑनलाइन कम्पैर करके उनके रिव्युस पढ़कर इन्शुरन्स लेना चाहिए 

अगर कोई एजेंट आपको सालो साल बहुत अच्छी सर्विस दे रहा है तो आप उससे पॉलिसी ले सकते हैं। लेकिन ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने के बहुत से फायदे हैं। ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने से आप सभी पॉलिसीस को आपस में कम्पैर कर सकते हैं, कस्टमर के रिव्यु पड़ सकते हैं और फ्यूचर में जब भी आपको क्लेम सेटलमेंट करना होगा तो ऑनलाइन इन्शुरन्स सेलर्स आपको सपोर्ट करते हैं। 

4 . अपने लाइफस्टाइल के हिसाब से ऐड-ऑन राइडर लेने चाहिए 

जब भी आप टर्म कवर लेते हैं तो प्रीमियम से थोड़े  ज्यादा पैसे देकर आप एडिशनल राइडर का ऑप्शन ले सकते हैं। जैसे क्रिटिकल इलनेस, एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट और वेवर ऑफ़ प्रीमियम। आपको अपने लाइफस्टाइल के हिसाब से राइडर्स लेने चाहिए। जैसे अगर आप फील्ड जॉब करते हैं तो एक्सीडेंटल डेथ बेनेफिट का राइडर आपको लेना चाहिए। लेकिन अगर आपकी फॅमिली में कोई ऐसी हेल्थ प्रॉब्लम है जो क्रिटिकल इलनेस में कवर हो रही है तो आपको क्रिटिकल इलनेस का कवर जरूर लेना चाहिए। 

5. क्लेम सेट्लमेंट रेश्यो 

इन्शुरन्स कंपनी का क्लेम सेट्लमेंट रेश्यो जरूर देखना चाहिए। लोग अक्सर पॉलिसी लेते से सिर्फ प्रीमियम का अमाउंट देखते हैं। क्लेम सेटलमेंट रेश्यो का मतलब होता है कि पॉलिसी होल्डर की डेथ होने पर इन्शुरन्स कंपनी कितने परसेंटेज आए हुए क्लेम को सेटल कर देती है। जितना ज्यादा क्लेम सेट्लमेंट रेश्यो होगा उतना अच्छा। आप इन्शुरन्स ले रहे हैं ताकि आपको क्लेम लेते समय पैसे मिल सके। लेकिन अगर इन्शुरन्स कंपनी का क्लेम सेट्लमेंट रेश्यो अच्छा नहीं है तो आपको क्लेम लेते समय बहुत तकलीफ आ सकती है। अगर आप ऑनलाइन पॉलिसी देख रहे हैं तभी कंपनी के क्लेम सेट्लमेंट रेश्यो को कम्पैर कर सकते हैं। 

6 . एक्सपेंसेस और चार्जेज

पॉलिसी से जुड़े हुए एक्सपेंसेस और चार्जेज पर ध्यान से देखे। जैसे हमने पहले भी बताया है कि सिर्फ प्रीमियम देखकर पॉलिसी नहीं ख़रीदे। इन्शुरन्स कंपनीज बहुत सी चार्जेज लगाती है। जैसे प्रीमियम एलोकेशन चार्जेज, पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्जेज, मोर्टेलिटी चार्जेज, फण्ड स्विचिंग चार्जेज। जब पॉलिसी लें तो इन चार्जेज को पहले समझ लें। अपने एडवाइज़र से पूछ लें कि इन चार्जेज का आपके रिटर्न पर क्या असर पड़ेगा। 

7 . लॉक-इन पीरियड 

 इसका मतलब है कि मिनिमम आपको कितने साल तक प्रीमियम भरना होगा। अक्सर पॉलिसी लेने के बाद लोगों को पता चलता है कि उनकी पॉलिसी में लॉक-इन पीरियड है। इसलिए जब भी पॉलिसी लें तो लॉक-इन पीरियड जरूर देख लें। ULIP में लॉक-इन पीरियड पांच साल का होता है। 

8 . फॉल्स / इन्कम्प्लीट इनफार्मेशन 

जब भी पॉलिसी लें तो इन्कम्प्लीट और रॉंग इनफार्मेशन मत बताये। लोग अक्सर जाने अनजाने में अपनी हेल्थ कंडीशन या फॅमिली हिस्ट्री के बारे में पॉलिसी लेते समय डिस्क्लोज़ नहीं करते। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें क्या नुकसान है। वैसे तो पॉलिसी लेते समय प्रॉब्लम नहीं होगी लेकिन  जब  सेटलमेंट की बात आएगी तब इन्शुरन्स कंपनी आपका क्लेम रिजेक्ट कर सकती है। उस समय पॉलिसी होल्डर तो दुनिया में होंगे नहीं लेकिन उनकी फॅमिली को क्लेम लेने में प्रॉब्लम आ सकती है। इसलिए पॉलिसी लेते समय इन्शुरन्स कंपनी से कोई भी बातें नहीं छुपाये। 

9 . मेडिकल टेस्ट 

लाइफ इन्शुरन्स पॉलिसी लेते समय मेडिकल टेस्ट जरूर करवाए। अगर आप सारी जानकारी पॉलिसी लेते समय ही बता देंगे तो फिर मेडिकल टेस्ट करवा लेना चाहिए इससे पॉलिसी लेते समय आपकी हेल्थ स्टेटस का रिकार्ड्स में आ जायेंगे और क्लेम लेते समय आपके हेल्थ रिकार्ड्स आपके काम आएंगे। 

10 . प्रीमियम पेमेंट फ्रीक्वेंसी

लोग अक्सर यह पूछते हैं कि पॉलिसी का प्रीमियम मंथली, क्वार्टरली या अनुअली कैसे करना चाहिए? तो सबसे अच्छा होगा कि आपको एनुअल प्रीमियम भरना चाहिए। मंथली या क्वार्टरली लेने पर प्रीमियम ज्यादा देना पड़ता है और अगर मंथली प्रीमियम भरेंगे तो आपको साल में 12 बार प्रीमियम भरना होगा। बहुत चांसेस है कि आप प्रीमियम भरना भूल भी सकते हैं जिससे आपकी पॉलिसी पर असर भी पड़ सकता है। 

तो अगली बार आप जब भी लाइफ इन्शुरन्स पॉलिसी लें तो इन 10 बातों का ध्यान जरूर रखें। 

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